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  • पिछले Episode #19 कलंकित इतिहास कथा..कहानी कुणाल की part 1 में हमने ये जाना कि कैसे सम्राट अशोक की पत्नी तिष्यरक्षिता जो उम्र में उनसे काफी छोटी थी अपने ही सौतेले पुत्र
    कुणाल की आंखें निकलवा देती है पर फिर भी खुशियाॅं जिसका दामन छोड़ना ना चाहे उसे खुशियाॅं मिल ही जाती है । ऐसा ही कुछ कुणाल के जीवन में भी हुआ ।क्या मौर्य साम्राज्य का वह मुकुट उनके सिर की शोभा बन सका ?क्या युवराज कुणाल राजसिंहासन पर आसीन हुए ?सिंहासन ना भी मिला हो पर कुणाल का खोया वैभव फिर लौट आया। पर कैसे यही जानने के लिए सुनिए रिलीजियस यात्री का यह एपिसोड .....हम आपके host Nidhhi S Jainn और Shilpa P Kasliwal इस नये episode के साथ कलंकित इतिहास कथा..कहानी कुणाल की part2

  • ये सदियों पुरानी एक ऐसी कहानी है। जिसमे छल प्रपंच की एक पूरी गाथा है। एक ऐसी इबारत जिसमे अपने विनाश की कहानी अपने  हाथों  से ही लिखी गयी। क्षणिक सुखों और तुच्छ स्वार्थो में अंधे होकर एक रानी नें न सिर्फ नारी जाति को ही बल्कि समूचे मानव इतिहास को कलंकित किया।



    अवंती नगरी जहां युवराज कुणाल पल-पल सुनहरे भविष्य की ओर अपने कदम बढ़ा रहे थे उज्जवल भविष्य जब अखंड भारत का साम्राज्य उनके हाथों में हो उसके सपने बुन रहे थे
    वह कहते हैं ना किसी को अल्प प्रयास से विशेष लाभ हो जाता है। औंधे पासे भी किसी का भाग्य सीधा कर देते है । तो किसी के भाग्य को दुर्भाग्य में बदल देती है ।कर्मों की रचना भी विभिन्न प्रकार की होती है इसलिए भविष्य के पर्दे की आड़ में छिपकर चुनौती देने वाली कर्म रचनाएं कब क्या करेगी यह तो केवली भगवान ही जान सकते हैं ।
    किंतु नियति कब राजा को रंक और रंक को राजा बना दे यह कोई नहीं जानता ।
    कुछ ऐसा ही युवराज कुणाल के साथ हुआ होनी को कुछ और ही मंजूर था।क्या मौर्य साम्राज्य का वह मुकुट उनके सिर की शोभा बन सका ?क्या युवराज कुणाल राजसिंहासन पर आसीन हुए ? रिलीजियस यात्री के आज के इस एपिसोड में मैं निधि लिए चलती हूं अवंती नगरी कुणाल का इतिहास जानने के लिए कुणाल पर एक सुंदर पुस्तक "राजा संप्रति" पंडित काशीनाथ जैन ने लिखी है इसमे अनेक ऐतिहासिक साक्ष्य है जो इसे संदेह से परे रखती है ।

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  • अपने निमित्त ज्ञान से श्रुत केवली महामुनी गोवर्धन आचार्य जी ने 7 वर्ष के नन्हे बालक भद्रबाहु के आंगोपांग को देखकर यह जान लिया कि भविष्य में यह बालक अंतिम श्रुतकेवली होगा । उस 7 वर्ष के नन्हे बालक को माता-पिता से लेकर गोवर्धन आचार्य जी ने संपूर्ण श्रुतज्ञान की शिक्षा दी आगे चलकर यही नन्हा बालक अंतिम श्रुतकेवली बना ।
    श्री भद्रबाहु आचार्य विरचित भद्रबाहु संहिता एवं सामुद्रिक करलेखन तथा रत्न कीर्ति गुरुदेव द्वारा रचित भद्रबाहु चरित्र आचार्य भद्रबाहु को पूर्णरूपेण जानने का एक उत्तम प्रयास होगा ।
    उन्हीं गुरु भद्रबाहु को समर्पित आज का यह एपिसोड
    "अष्टांग महा निमित्त ज्ञानी आचार्य भद्रबाहु"
    in "RELIGIOUS YATRI
    by
    NIDHHI S JAINN
    SHILPA P KASLIWAL


  • मौर्य शासक सम्राट बिंदूसार

    महान पिता का पुत्र महान पुत्र का पिता सम्राट बिंदूसार इस नाम से इतिहास में जाने गये क्योंकि वे महान चंद्रगुप्त मौर्य के पुत्र महान सम्राट अशोक के पिता थे । उन्हें आजीविका संघ का अनुयायी बतलाया गया । गया (बिहार) के पास बारबरा की पहाड़ी में आजीविका संघ के साधुओं के लिए सम्राट अशोक ने गुफाएं बनवा कर अपने पिता बिंदुसार को समर्पित की किंतु जिसके जीवन में जैन धर्मावलंबी पिता व जीवन में आचार्य भद्रबाहु का सानिध्य समय समय पर रहा हो वह जैन धर्मावलंबी ही प्रतीत होता है । इतिहास की बातों को जानने के लिए सुनिये आज का ये podcast
    भारतीय इतिहास की रूपरेखा, संक्षिप्त जैन इतिहास इन पुस्तकों से बहुत सा इतिहास पता चलता है ।

  • गोम्मटेश्वर बाहुबली की प्रतिमा का निर्माण पूरा हुआ।
    बाहुबली की प्रतिमा निष्पन्न हुई। चामुंडरायजी की माता काललदेवी ने बाहुबली की प्रतिमा के निर्माण तक दूध न ग्रहण करने का संकल्प लिया था पर ना जाने कब वे मस्तकाभिषेक तक दूध ना ग्रहण करने का प्रण कर चुकी थी।क्या मस्तकाभिषेक निर्विघ्न संपन्न हुआ ? यदि हुआ तो कैसे? इसी इतिहास से आप सभी को रूबरू कराने के लिए आज का यह एपिसोड ................
    नीरज जी जैन ने अपनी पुस्तक गोमटेश गाथा में भगवान बाहुबलि का खूबसूरत वर्णन किया है ।
    Nitin h. P. ने भी भगवान का सुंदर वर्णन किया है ।

  • गोम्मटेश्वर बाहुबली की प्रतिमा कहाॅं बनेगी यह तय हो गया।काललदेवी ने बाहुबली के दर्शन के बिना दूध ग्रहण न करने का प्रण ले लिया था।अतः अपनी माता के प्रण को पूरा करने के लिए चामुंडरायजी ने श्रवणबेलगोला में बाहुबली भगवान की मूर्ति निर्माण करने का निश्चय किया । क्या मूर्ति का निर्माण यहाॅं हो सका? और हुआ तो कैसे? इसी इतिहास से रूबरू कराने के लिए आज का यह एपिसोड

    " गोम्मटेश्वर बाहुबली कैसे बनी यह प्रतिमा"
    नीरज जैन ने अपनी पुस्तक गोमटेश गाथा में भगवान बाहुबली का बहुत खूबसूरत चित्रण किया है

  • टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा २००७ में किए गए एक सर्वेक्षण में भारत के सात आश्चर्य में से प्रथम आश्चर्य चुने जाने का गौरव गोमटेश्वर बाहुबली की विशाल प्रतिमा को मिला । कुछ तो बात होगी इस प्रतिमा में जिसे देखने के लिए सुदूर प्रांतों से,विदेशों से लाखों की संख्या में पर्यटक श्रवणबेलगोला में आते ही रहते हैं । इस प्रतिमा का निर्माण श्रवणबेलगोला में ही क्यों हुआ इसका इतिहास रुचिकर है इस एपिसोड के माध्यम से इसे ही बतलाने का प्रयास किया गया है । "JAIN SHILALEKH SANGRAHA" BY "BABU HIRALALJI" IS THE BEST WELL KNOWN BOOK TO KNOW GOMMATESHWAR BAHUBALI AND SHRAVANBELGOLA IN A BETTER WAY

  • शून्य की आराधना करने वाला , अज्ञान से मुक्ति होती है ऐसे सिद्धांत को मानने वाला एक संप्रदाय भगवान महावीर और गौतम बुद्ध के समकालीन हुआ जिसके नेता के रूप में मख्खलि गोशाल हुए जिन्होंने आठ चरम बतलाए ये चरम तत्व थे- ‘1. चरम पान 2. चरम गीत 3. चरम नृत्य 4. चरम अंजलि (अंजली चम्म-हाथ जोड़कर अभिवादन करना) 5. चरम पुष्कल-संवर्त्त महामेघ 6. चरम संचनक गंधहस्ती 7. चरम महाशिला कंटक महासंग्राम 8. मैं इस महासर्पिणी काल के 24 तीर्थंकरों में चरम तीर्थंकर के रूप में प्रसिद्ध होऊंगा यानी सब दुःखों का अंत करूंगा।ये आठवाँ चरम पानाक् ही उनके जीवन का लक्ष्य था । किंतु उन्होंने सातवी रात्रि मृत्यु का वरण किया । पंडित कैलाश चंद्र जी लिखित जैन धर्म की पुस्तकों में गोशाल का विस्तृत वर्णन है। जैन और बौद्ध ग्रंथों में उनका उल्लेख मिलता ही रहता है।

  • भारतीय इतिहास में सबसे लंबा शासन करने वाली रानी चैनाभैरादेवी जिन्हें "काली मिर्च रानी" के नाम से जाना जाता है गेरूसोप्पा पर ५४ वर्ष तकअनवरत शासन करने वाली इस रानी के अदम्य साहस, कुशल प्रशासन,दृढ़ संकल्प ने पुर्तगालियों को समय-समय पर युद्ध करके करारी मात दी । जैन धर्मावलंबी रानी चैनाभैरादेवी को
    भारतीय इतिहास में ही नहीं बल्कि विदेशी इतिहासकारों ने भी अपनी पुस्तक में जगह दी । जैन साहित्य में गेरूसोप्पा को जो कर्नाटक में स्थित है एक विशेष स्थान मिला है । "दक्षिण भारत में जैन धर्म " इस पुस्तक में पंडित कैलाशचंद्रजी सिद्धांताचार्य ने गेरुसोप्पा का बहुत खूबसूरत उल्लेख किया है ।

  • भगवान महावीर के शासनकाल के समय महावीर निग्गंठ नातपूत के अलावा छह और तैर्थिकों का उल्लेख इतिहास में मिलता है । ये सभी अपने को तीर्थंकर या अरिहंत कहते थे । बिहार के गया से ३२ किलोमीटर की दूरी पर बारबरा की पहाड़ियों पर कुछ गुफाएं आजीवक संघ के लिए सम्राट अशोक ने बनवाई ऐसा उल्लेख भी इतिहास में मिलता है । यह आजीविका संघ कहाॅं से आया? कौन इसके धर्म नायक थे, अनुयायी थे? बाबू कामता प्रसादजी जैन, बलदेव जैन इन्होंने जैन इतिहास पर लिखी अपनी पुस्तकों में आजीविका संघ का बहुत खूबसूरत वर्णन किया है । इस एपिसोड में यही जानने का प्रयास करेंगे आजीविका संघ के सिद्धांत क्या थे?

  • कर्नाटक के उल्लाल शहर की रहने वाली कौन थी यह रानी अबक्का जिनके नाम पर हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में निर्मित 5 तटवर्ती जहाजों की श्रृंखला का पहला पोत रानी अबक्का के नाम पर है जिनके नाम पर कर्नाटक में प्रतिवर्ष वीर रानी अबक्का उत्सव मनाया जाता है । यह वही रानी अबक्का थी जिन्होंने पुर्तगालियों को नाकों चने चबा दिए अपने शौर्य, साहस , कुशल रणनीति, बुद्धिमत्ता के दम पर इतिहास में अभया रानी कहलाई

  • यह पुर्तगाली थे कौन जो भारत में अपना आधिपत्य जमाने आए थे ? क्या यह अपने मंसूबों में कामयाब हुए? आइए इतिहास के पन्नों को पलटकर जानने का प्रयास करते हैं हैं इन विदेशी व्यापारी कम साम्राज्यवादी पुर्तगालियों के बारे में रिलीजियस यात्री के इस एपिसोड के माध्यम से
    पुर्तगालियों के बारे में जानने से हम उन वीरांगनाओं के बारे में भी जानने का प्रयास करेंगे जिन्होंने इन पुर्तगालियों को नाकों चने चबवा दिए ।
    वीर रानी अबक्का और रानी चैना भैरादेवी जैसी वीरांगनाओं के होते हुए पुर्तगाली कुछ महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर अपना अधिकार नहीं जमा पाए

  • प्रोफेसर जी ब्रह्माप्पा की पुस्तक दान चिंतामणि पर आधारित । हजारों वर्ष पूर्व का कर्नाटक । जैन कुल मे एक शूरवीर युवक के साथ एक निष्ठावान श्रावक की दो पुत्रियां अतिमब्बे और गुंडूमब्बे का विवाह हुआ । युद्ध में नायक के वीरगति पाने के कारण सुख शांति से भरा परिवार दुख के सागर में डूब गया। उत्तम संस्कारों के बल पर दिगंबर गुरु का मार्गदर्शन लेकर उस साहसी महिला ने परोपकार और जिनशासन की सेवा करने का व्रत लिया। फिर अपने शेष जीवन का हर क्षण और परिवार की अतुल संपदा का कण-कण उसी साधना में लगा दिया और कहलाई " दान चिंतामणि "

  • हजारों वर्ष पूर्व का कर्नाटक । जैन कुल मे एक शूरवीर युवक के साथ एक निष्ठावान श्रावक की दो पुत्रियां
    अतिमब्बे और गुंडूमब्बे का विवाह हुआ । युद्ध में नायक के वीरगति पाने के कारण सुख शांति से भरा परिवार दुख के सागर में डूब गया। उत्तम संस्कारों के बल पर दिगंबर गुरु का मार्गदर्शन लेकर उस साहसी महिला ने परोपकार और जिनशासन की सेवा करने का व्रत लिया। फिर अपने शेष जीवन का हर क्षण और परिवार की अतुल संपदा का कण-कण उसी साधना में लगा दिया और कहलाई दान चिंतामणि
    प्रोफेसर जी ब्रह्माप्पा की पुस्तक दान चिंतामणि पर आधारित

  • Beautiful story of Kalinga King Karkandu during the period of Tirthankar Parshwanath. alongwith how Dharashiv Caves came into existence ...history of a Digamber jain temple in Ter nagar close to Usmanabad Maharashtra India

  • इस एपिसोड में सुनेंगे कलिंग के जैन राजाओं की कहानियाँ जिन्होंने जैन धर्म को कलिंग में फैलाया। जानने का प्रयास करेंगे प्राचीन में कलिंग नाम से पहचाने जाने वाले आज के उड़ीसा के इतिहास को

  • भारतवर्ष का दिगंबर जैन तीर्थ स्थल जहां वर्तमान अवसर्पिणी के आठवे तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु के समवशरण की रचना और नंग अनंग कुमार सहित साढ़े पाँच करोड़ मुनियों की निर्वाण स्थली के रूप में प्रतिष्ठित प्राचीन "सुवर्णागिरी" वर्तमान में सिद्ध क्षेत्र "सोनागिरी" का इतिहास

  • उत्तर से दक्षिण तक अनेक संस्कृति सभ्यता को समेटे,कला और वास्तु को अपने आंचल में लपेटे,इतिहास के साक्षी यह जिनालय और उनकी अतिशयकारी गाथा अलग-अलग एपिसोड्स में अनूठे ढंग से